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भाई की मौत का बदला लेने की बात कहने वाले आशीष तिवारी पर पहले से दर्ज हैं विभागीय मामले, पुलिस ने बताई पूरी कहानी

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भोजपुर भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले के बाद वायरल वीडियो में बयान देने वाले आशीष तिवारी को लेकर पुलिस मुख्यालय ने जानकारी दी है। उसके खिलाफ पहले से दो विभागीय कार्रवाई लंबित हैं।

आरा/आलम की खबर:भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद सामने आए एक वायरल वीडियो ने मामले को नई चर्चा में ला दिया है। वीडियो में खुद को पुलिस का सिपाही बताने वाला आशीष तिवारी अपने भाई की मौत का बदला लेने और नौकरी छोड़ने जैसी बातें करता दिखाई दे रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

हालांकि पुलिस मुख्यालय की ओर से इस मामले में अलग जानकारी सामने रखी गई है। पुलिस विभाग के अनुसार वायरल वीडियो में किए गए दावों और आशीष तिवारी की वास्तविक सेवा स्थिति में अंतर है। विभाग ने बताया है कि आशीष तिवारी बिहार पुलिस में आरक्षी संख्या-647 के पद पर तैनात है और वर्तमान में मोतिहारी पुलिस लाइन में पदस्थापित है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार आशीष तिवारी के खिलाफ पहले से ही दो अलग-अलग विभागीय मामले चल रहे हैं। दोनों मामलों की जांच विभागीय स्तर पर जारी है और जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार पहला मामला वर्ष 2023 का है। उस समय आशीष तिवारी की तैनाती हरपुर ओपी में थी। विभागीय कार्यवाही संख्या 21/2023 के तहत उसके खिलाफ अनुशासनहीनता से जुड़ा मामला दर्ज किया गया था।

आरोप के अनुसार 7 जनवरी 2023 की रात ड्यूटी के दौरान आशीष तिवारी का अपने सहकर्मी पुलिसकर्मियों के साथ विवाद हुआ था। विभागीय जांच में आरोप लगाया गया कि उसने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और गार्ड रूम में जाकर हथियार तलाशने की कोशिश की।

आरोप यह भी था कि हथियार नहीं मिलने के बाद वह चाकू लेकर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर बढ़ा। इस घटना को पुलिस विभाग ने गंभीर अनुशासनहीनता माना था। इसके बाद विभागीय प्रक्रिया के तहत उसे सजा दी गई थी। जानकारी के अनुसार उसकी छह माह की वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई थी और भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी दी गई थी।

इसके बाद दूसरा मामला वर्ष 2024 में सामने आया। यह मामला उस समय का है, जब आशीष तिवारी पिपरा कोठी थाना में तैनात था। विभागीय कार्यवाही संख्या 58/2024 के तहत इस मामले की जांच चल रही है।

आरोप है कि 17 अगस्त 2024 को ड्यूटी के दौरान आशीष तिवारी ने सहकर्मियों और गार्ड के साथ गलत व्यवहार किया। मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि उसने 9 एमएम पिस्तौल को कॉक कर फायरिंग कर दी थी।

घटना के दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे अधिकारियों को धमकी देने और उन पर फायर करने का प्रयास करने का आरोप भी लगाया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार स्थिति बिगड़ने पर उसने खुद को गोली मारने की धमकी तक दी थी।

इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। एफआईआर संख्या 173/2024 के तहत मामले की जांच की गई और विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई चल रही है।

भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद वायरल वीडियो में आशीष तिवारी द्वारा दिए गए बयान ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। वीडियो में वह अपने भाई की मौत को लेकर आक्रोश व्यक्त करता नजर आ रहा है। उसके बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

पुलिस विभाग अब वायरल वीडियो की भी जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी वीडियो या बयान के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है। वीडियो कब बनाया गया, किस परिस्थिति में बनाया गया और उसमें कही गई बातों का वास्तविक संदर्भ क्या है, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

इस पूरे मामले में पुलिस मुख्यालय का कहना है कि विभाग किसी भी कर्मचारी के आचरण को गंभीरता से लेता है। अगर किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ अनुशासनहीनता या नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिलती है तो विभागीय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है।

भरत भूषण तिवारी मामले के बाद अब आशीष तिवारी से जुड़े पुराने विभागीय रिकॉर्ड भी चर्चा में आ गए हैं। पुलिस विभाग की ओर से सामने रखी गई जानकारी के बाद यह साफ है कि वायरल वीडियो में किए गए दावों के साथ-साथ संबंधित पुलिसकर्मी का पुराना रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

फिलहाल दोनों विभागीय मामलों की जांच जारी है और वायरल वीडियो को लेकर भी पुलिस अपने स्तर से तथ्यों की पुष्टि कर रही है। आने वाले समय में जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो पाएगी।

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भरत भूषण तिवारी मामले के बाद सामने आए घटनाक्रम ने पुलिस विभाग में अनुशासन और सोशल मीडिया पर दिए जाने वाले बयानों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

किसी भी गंभीर घटना के बाद भावनाएं स्वाभाविक रूप से जुड़ी होती हैं, लेकिन पुलिस सेवा में रहने वाले कर्मचारियों के लिए नियम और अनुशासन का पालन बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच ही सच्चाई तक पहुंचने का सबसे बेहतर रास्ता है।

पुलिस विभाग की जिम्मेदारी है कि वह तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करे और आम लोगों के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट रखे।

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